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Chhath Puja 2017:नहाए खाए व्रत आज, डूबते और उगते सूर्य को देंगे अघ्र्य

27 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव,भोपाल में घाटों की साफ-सफाई शुरू, प्रकाश और अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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Chhath Puja 2017

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भोजपुरी समाज के लोगों द्वारा छठ पूजा की तैयारियां जोरशोर से जारी हैं। चार दिवसीय छठ पूजा महोत्सव की शुरुआत 24 को नहाए खाए व्रत के साथ होगी। यह महोत्सव 27 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत 26 और 27 अक्टूबर को भोजपुरी समाज के छठ व्रतधारियों द्वारा घाटों पर एकत्रित होकर डूबते और उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। इस दौरान सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। इसके लिए घाटों की साफ-सफाई, वहां पर प्रकाश और अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

छठ त्‍योहार एक साल में दो बार मनाया जाता है। यह पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में। वहीं हिन्दू पंचांग की की अगर बात करें तो, चैत्र शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ त्‍योहार को चैती छठ कहा जाता है जबकि कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस त्‍योहार को कार्तिकी छठ कहा जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह त्‍योहार काफी लोकप्रिय पर्व है। इस त्‍योहार को यहां पर पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।

भोपाल शहर में भोजपुरी समाज की आबादी तीन लाख से अधिक है। इस बार शहर में 31 स्थानों पर सामूहिक रूप से छठ पूजा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि शहर में समाज की बड़ी आबादी निवास करती हैं, कई बार बच्चों की परीक्षा, नौकरी से छुट्टी नहीं मिलने जैसे अन्य कारणों से लोग अपने घर छठ मनाने नहीं जा पाते हैं, इसलिए मंच की ओर से हर साल यह आयोजन किया जाता है और समाज के लोग सामूहिक रूप से एकत्रित पूजा-अर्चना करते हैं। मंच की ओर से मुख्य आयोजन शीतलदास की बगिया में होगा।

सूर्य की उपासना का पर्व:
छठ पूजा भारत में भगवान सूर्य की उपासना का सबसे प्रसिद्ध हिंदू त्‍योहार है। इस त्‍योहार को षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है, जिस कारण इसे सूर्य षष्ठी व्रत या छठ कहा गया है।

त्‍योहार एक साल में दो बार मनाया जाता है- पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में। हिन्दू पंचांग की की अगर बात करें तो, चैत्र शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ त्‍योहार को चैती छठ कहा जाता है जबकि कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस त्‍योहार को कार्तिकी छठ कहा जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह त्‍योहार काफी लोकप्रिय पर्व है। इस त्‍योहार को यहां पर पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।

छठ पूजा महोत्सव का इतिहास और महत्व :
माना जाता है कि एक बार पांडव जुए में अपना सारा राज-पाट हार गए। तब पांडवों को देखकर द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था। इस व्रत के बाद दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुई थीं। तभी से इस व्रत को करने की प्रथा चली आ रही है।
परंपरा के अनुसार छठ पर्व के व्रत को स्त्री और पुरुष समान रूप से रख सकते हैं। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली पौराणिक और लोककथाओं के अनुसार यह पर्व सर्वाधिक शुद्धता और पवित्रता का पर्व है।

महापौर ने किया घाटों का निरीक्षण:
महापौर आलोक शर्मा ने सोमवार शाम को शीतलदास की बगिया, प्रेमपुरा घाट और छोटी झील के किनारे स्थित खटलापुरा घाट तथा पांच नंबर स्थित तालाब के घाट पर छट पूजा के दृष्टिगत निगम द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत घाटों के व्यवस्थीकरण, साफ सफाई, प्रकाश, पेयजल तथा अस्थायी चेंजिंग रूम बनाने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छठ पर्व आयोजन समितियों के पदाधिकारियों से चर्चा की तथा छठपूजा वाले शहर के सभी स्थानों पर निगम द्वारा करायी जा रही व्यवस्थाओं को समय से पूर्व सुनिश्चित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए।

रंगारंग आतिशबाजी के साथ होगा दीपदान:
भोजपुरी भाषी विकास संघ द्वारा पांच नंबर तालाब पर छठ पर्व मनाया जाएगा। संघ के अध्यक्ष प्रेमनारायण गिरी और सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मिथिलेश राय ने बताया कि इस बार रंगारंग आतिशबाजी और तालाब में दीपदान मुख्य आकर्षण होंगे। इस साल भी छठ घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

इसमें उत्तर प्रदेश से आए भोजपुरी गायक छठ मैया के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुतियां देंगे। आज से होगी शुरूआत छठ पूजा महोत्सव की शुरुआत 24 को नहाए खाए व्रत के साथ होगी। इसी प्रकार 25 अक्टूबर को खरना होगा और 26 अक्टूबर को महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत रखा जाएगा। इस दौरान शाम को समाज के महिला पुरुष सरोवरों के किनारे पहुंचेंगे, यहां विशेष पूजा अर्चना होगी, और सूप में गन्ना, विभिन्न प्रकार के मौसमी फल आदि रखकर कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य देंगे। २७ अक्टूबर की सुबह भी श्रद्धालु घाटों पर पहुंचकर उगते सूर्य को अघ्र्य देंगे व व्रत का पारायण करेंगे।
खटलापुरा घाट, सरस्वती मंदिर बरखेड़ा, काली मंदिर घाट, पांच नंबर, शीतला माता मंदिर फतेहगढ़, ओल्ड सुभाष नगर, बैरागढ़, कर्बला पम्प हाउस, मालीखेड़ी, हथाईखेड़ा डेम, विश्वकर्मा मंदिर बाग सेवनिया, अमराई सहित कुल 31 स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन होगा।

वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार लंका पर विजय प्राप्‍त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

छठ पूजा 2017: मुहूर्त समय :-
छठ पूजा के दिन कब होगा सूर्यादय - 06:41 am
छठ पूजा के दिन कब होगा सूर्यास्त- 18:05 pm

ये है छठ पूजा की डेट :-
षष्ठी तिथि प्रारंभ- 25 अक्टूबर को सुबह 09:37, 2017
षष्ठी तिथि समाप्ति- 26 अक्टूबर 2017 को शाम 12:15 बजे पर।

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